चालीसा · Navagraha

Navagraha Chalisa

नवग्रह चालीसा

The Navagraha Chalisa is a devotional hymn of forty chaupais (quatrains) and two dohas that praises all nine celestial planets (Grahas) of Vedic astrology: Surya (Sun), Chandra (Moon), Mangal (Mars), Budh (Mercury), Guru (Jupiter), Shukra (Venus), Shani (Saturn), Rahu (ascending node), and Ketu (descending node). In Hindu tradition, these nine cosmic bodies govern every aspect of human life — health, wealth, relationships, career, and spiritual progress. Reciting this Chalisa is believed to pacify malefic planets, strengthen benefic ones, and bring harmony and balance to one's birth chart (Kundali).

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दोहा 1
नव ग्रहों को नमन करूँ, सूर्य प्रथम कर ध्यान। चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र, शनि राहु केतु महान॥
दोहा 2
नव ग्रह की महिमा अपार, जीवन में हैं अधिकार। शुभ फल दो ग्रह देव हमें, दूर करो सब विकार॥
चौपाई 1
जय सूर्य देव दिव्य प्रकाशा। लोक लोक में करो उजासा। सात अश्वों पर सवार सूरज। तेज और शक्ति के तुम पुंज॥
चौपाई 2
रविवार को सूर्य उपासना। आरोग्य यश की यह साधना। सूर्य नमस्कार नित जो करे। सूर्य देव की कृपा भरे॥
चौपाई 3
जय चन्द्रमा शीतल सुखदाई। मन की शक्ति तुम से आई। सोमवार को चन्द्र उपासे। मन शांति और सुख की आसे॥
चौपाई 4
चन्द्र मन का कारक ग्रह है। कुण्डली में शुभ स्थान रहे। शिव शंकर की जटा विराजे। चन्द्रमा शीश पर सदा साजे॥
चौपाई 5
जय मंगल देव महावीर। लाल वर्ण और शक्ति गंभीर। मंगलवार को मंगल पूजो। भूमिपुत्र से कार्य न जूझो॥
चौपाई 6
मंगल दोष निवारण करते। साहस और बल प्रदान करते। लाल फूल और मसूर अर्पण। मंगल देव करें कल्याण॥
चौपाई 7
जय बुध देव बुद्धि दायक। ज्ञान विज्ञान के प्रदायक। बुधवार को बुध की पूजा। बुद्धि और वाणी हो सूझा॥
चौपाई 8
हरा रंग बुध का सुहावे। बुध दशा में सुख को लावे। व्यापार वाणिज्य बुध करावे। जातक को बुद्धि से भरावे॥
चौपाई 9
जय गुरु देव बृहस्पति ज्ञानी। देव गुरु तुम जग महिमानी। गुरुवार को पूजे गुरु को। ज्ञान धर्म और यश मिले शुभ को॥
चौपाई 10
पीला रंग गुरु का प्यारा। गुरु कृपा से जग उजियारा। सन्तान और विद्या देते। गुरु की कृपा भक्त पाते॥
चौपाई 11
जय शुक्र देव सौम्य सुहाने। प्रेम कला और सुख के गाने। शुक्रवार को शुक्र उपासो। सुख वैभव में मन को रासो॥
चौपाई 12
शुक्र विवाह सुख का दाता। दाम्पत्य जीवन में सुख खाता। सफ़ेद रंग और इत्र चढ़ाओ। शुक्र देव का मन हर्षाओ॥
चौपाई 13
जय शनि देव महाराज। न्याय कर्म के प्रभु और राज। शनिवार को शनि उपासे। काले तिल और तेल सुहासे॥
चौपाई 14
शनि ढैय्या साढ़े साती। जीवन में आती है राती। शनि पूजा से संकट टले। शनि देव की कृपा से चले॥
चौपाई 15
जय राहु ग्रह छाया शक्ति। तंत्र और साधना की भक्ति। राहु दशा में सावधान रहो। राहु पूजन से सुख को गहो॥
चौपाई 16
राहु अमावस पर पूजो भाई। नारियल तिल और उड़द चढ़ाई। राहु सर्प का मस्तक भाग। इसकी पूजा से दूर हो दाग॥
चौपाई 17
जय केतु ग्रह मोक्ष दाता। आध्यात्म और ज्ञान विधाता। केतु अमावस पर पूजो भाई। तिल और खिचड़ी शुभ चढ़ाई॥
चौपाई 18
केतु सर्प की पूंछ का भाग। केतु दशा में हो जाग। ज्ञान वैराग्य और मोक्ष दे। केतु की कृपा जीव में भरे॥
चौपाई 19
नव ग्रह की महिमा महान। जन्म पत्री में हैं प्रधान। शुभ ग्रह को और बलवान करो। अशुभ ग्रहों का शमन करो॥
चौपाई 20
ग्रह शांति पूजन करावो। जीवन में सुख समृद्धि लावो। नवग्रह यज्ञ से पाप नाशे। सुख शांति जीवन में भाशे॥
चौपाई 21
नवरत्न धारण शुभ होता। ग्रह दोष से जीव को पोता। ज्योतिषी से परामर्श लो। ग्रह रत्न धारण कर लो॥
चौपाई 22
सूर्य रत्न माणिक मनमाना। चन्द्र मोती से मन भाना। मंगल रत्न मूँगा सुन्दर। बुध पन्ना हरा मनोहर॥
चौपाई 23
गुरु पुखराज पीला सोहे। शुक्र हीरा मन को मोहे। शनि का नीलम नीला गहरा। राहु गोमेद करे उजहरा॥
चौपाई 24
केतु लहसुनिया गुण दाता। ग्रह रत्न से सुख की माता। सोच समझ के रत्न धारो। जीवन में शुभ फल को पारो॥
चौपाई 25
सूर्य पूर्व में उदय होते। जगत को रोशनी में नहाते। प्रात काल में अर्घ्य दो रे। सूर्य देव को नमन करो रे॥
चौपाई 26
चन्द्र शक्ति समुद्र में खींचे। जीवन में उसके बल को सींचे। पूर्णिमा पर चन्द्र उपासो। खीर चढ़ाओ मन को रासो॥
चौपाई 27
पंचांग में ग्रह की स्थिति देखो। शुभ मुहूर्त में कार्य परखो। राहु काल में शुभ काम न करो। शुभ घड़ी में सब काम सँवरो॥
चौपाई 28
ग्रह दशा जीवन को प्रभावे। सुख दुख सब वो ही दिलावे। ग्रह की शांति से जीवन सुधरे। ज्योतिष विद्या से राह मिले॥
चौपाई 29
शुभ ग्रह गुरु और शुक्र चन्द्र। बुध भी करे शुभ जब हो सुन्दर। अशुभ शनि मंगल और राहु। केतु भी कभी बने आहु॥
चौपाई 30
नव ग्रह पूजन से कल्याण। भक्त को मिले शुभ वरदान। नवग्रह स्तोत्र और मंत्र जपें। ग्रह दोष से जीवन बचें॥
चौपाई 31
जो नित नवग्रह चालीसा गावे। उसके जीवन में सुख आवे। ग्रह पीड़ा दूर हो जावे। शुभ फल जीवन में आ जावे॥
चौपाई 32
नव ग्रह मंदिर में जाओ। नारियल फूल माला चढ़ाओ। दीप जलाकर आरती करो। नव ग्रहों को प्रणाम करो॥
चौपाई 33
सूर्यास्त सूर्योदय ध्यान धरो। नव ग्रहों का मन में स्मरण करो। संध्या वंदन नित्य करो रे। ग्रह देवों को नमन करो रे॥
चौपाई 34
ग्रह दोष से मुक्ति पाओ। शांति यज्ञ कर सुख लाओ। विशेष मंत्र जाप करो जी। ग्रह देवों से आशीर्वाद लो जी॥
चौपाई 35
पंचांग का अध्ययन करो। ग्रह चाल को समझ लो जरो। शुभ और अशुभ ग्रह समझे। जीवन में उनसे कैसे जुड़े॥
चौपाई 36
नव ग्रह देव सब मिलकर आओ। भक्त के जीवन को सजाओ। शुभ फल से जीवन भर दो। संकट और दुख को हर लो॥
चौपाई 37
कुंडली में ग्रह बलवान हो। हर दिशा में जय का मान हो। धर्म अर्थ काम मोक्ष मिले। नव ग्रह कृपा से सब कुछ मिले॥
चौपाई 38
नवग्रह चालीसा का पाठन। सबको देता शुभ फल और रक्षण। भक्ति से जो इसे गावे। नव ग्रह कृपा से जग में जावे॥
चौपाई 39
शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन। नव ग्रह पूजा नित्य अनुसरण। बृहस्पतिवार को गुरु ध्यावे। शनिवार को शनि मन लावे॥
चौपाई 40
नवग्रह चालीसा यह पावन। भक्तों के हित में मन भावन। नित पढ़े जो श्रद्धा से कोई। नव ग्रह दोष से मुक्त वह होई॥

Frequently Asked Questions about Navagraha Chalisa

What are the Navagraha (nine planets) in Vedic astrology?

The Navagraha are the nine celestial bodies that form the basis of Vedic astrology: Surya (Sun), Chandra (Moon), Mangal (Mars), Budha (Mercury), Guru (Jupiter), Shukra (Venus), Shani (Saturn), Rahu (the north/ascending lunar node), and Ketu (the south/descending lunar node). Unlike Western astronomy, Rahu and Ketu are shadow planets (mathematical points) rather than physical celestial bodies.

How do the nine planets affect human life according to Vedic astrology?

In Vedic astrology (Jyotish), each planet governs specific aspects of life: Surya governs the soul, father, health, and authority; Chandra rules the mind and emotions; Mangal governs energy, courage, and property; Budha rules intelligence and communication; Guru (Jupiter) governs wisdom, children, and fortune; Shukra rules love, art, and luxury; Shani governs discipline, karma, and longevity; Rahu and Ketu govern karmic patterns and spiritual liberation.

What are the benefits of reciting the Navagraha Chalisa?

Reciting the Navagraha Chalisa is believed to pacify malefic planets in the birth chart, strengthen benefic ones, remove planetary doshas (afflictions) such as Mangal Dosha and Shani Sade Sati, bring overall harmony and balance to one's astrological chart, and promote health, prosperity, and spiritual growth. It is also recited before important undertakings to ensure planetary blessings.

Which day of the week should each planet be worshipped?

Each planet has a dedicated day: Surya (Sun) — Sunday; Chandra (Moon) — Monday; Mangal (Mars) — Tuesday; Budha (Mercury) — Wednesday; Guru/Brihaspati (Jupiter) — Thursday; Shukra (Venus) — Friday; Shani (Saturn) — Saturday. Rahu and Ketu are traditionally worshipped on new moon days (Amavasya) or during Rahu Kala (the daily inauspicious period).

What is the connection between the Navagraha and the Panchang?

The Panchang (Hindu almanac) is entirely built around the positions and movements of the Navagraha. The five elements of the Panchang — Tithi (lunar date), Vara (weekday named after the planets), Nakshatra (lunar mansion), Yoga, and Karana — are all calculated from planetary positions. The Panchang guides the selection of auspicious times (Muhurta) based on the current planetary configuration, making knowledge of the Navagraha essential for Panchang reading.

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