चालीसा · Kali

Kali Chalisa

काली चालीसा

The Kali Chalisa is a devotional hymn of forty chaupais (quatrains) and two dohas dedicated to Goddess Kali — the fierce, dark, and transformative form of the Divine Mother. Kali is the destroyer of ego, evil, and the cycle of time itself; her name literally means "she who is beyond time." This Chalisa is traditionally recited during Navratri (especially on the night of Saptami/Ashtami), on new moon nights (Amavasya), and during the Kali Puja celebrated on Diwali night in Bengal and Odisha. Devotees seek her protection from negative energies, evil forces, and the fear of death.

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दोहा 1
जय काली माँ जगदम्बे, श्याम वर्ण विकराल। नर मुण्डों की माला पहने, महाकाल की कृपाल॥
दोहा 2
काल रात्रि तुम काल हरत, काली माँ महिमान। भक्तन के दुःख दूर करो, नित करो कल्याण॥
चौपाई 1
जय जय जय महाकाली माँ। जय काली जग की पालनहारी। रक्त वदन खड्ग कर धारी। भक्त जनन की दुःख निवारी॥
चौपाई 2
काली माँ श्यामल तन सुन्दर। केश खुले भयंकर सुन्दर। त्रिनेत्र विशाल लाल दहकत। महाशक्ति जग को रहत पहकत॥
चौपाई 3
नर मुण्डों की माला पहने। रक्त रंजित वस्त्र पहने। खड्ग त्रिशूल कर में धारे। असुर संहार नित्य उजारे॥
चौपाई 4
दिगम्बर महाकाली माता। तुम ही जग की सृष्टि विधाता। आदिशक्ति तुम परम पुरानी। सकल सृष्टि में व्यापी भवानी॥
चौपाई 5
महिषासुर मर्दिनी माँ काली। शुम्भ निशुम्भ नाशिनी माँ काली। चण्ड मुण्ड संहारिणी देवी। रक्तबीज विनाशिनी सेवी॥
चौपाई 6
महाकाल की शक्ति महाकाली। त्रिभुवन में व्यापी कृपाली। सर्वशक्ति स्वरूपा माँ काली। अखिल विश्व की माँ महाकाली॥
चौपाई 7
काशी में काली विराजे। तारा रूप कामाख्या साजे। दक्षिणकाली कोलकाता में। भक्त सदा दर्शन पाते में॥
चौपाई 8
तुम्हारे चरण में मस्तक झुकावें। भक्त जनन के मन को भावें। दिन दुखी और निर्बल आवे। काली माँ तब दूर दुख जावे॥
चौपाई 9
भूत प्रेत सब दूर भगावे। तन्त्र मन्त्र की बाधा हटावे। काल भैरव संग विहारिणी। लोक कल्याणकारी संचारिणी॥
चौपाई 10
कवि जन तुम्हारी महिमा गावे। शास्त्रों में तुम्हारा यश छावे। वेद पुराण सब तुम्हें पुकारे। ऋषि मुनि तव गुण गावें न्यारे॥
चौपाई 11
अमावस्या की रात अँधेरी। काली पूजा में बजे बधेरी। भक्त दीप जलाकर गावे। माँ के चरणों में शीश नवावे॥
चौपाई 12
जीव जगत की रक्षा करती। शत्रु नाश की शक्ति भरती। शरणागत की रक्षक माता। भय और संकट दूर हटाता॥
चौपाई 13
काली माँ की भक्ति करो हे। निशि दिन उनको नमन करो हे। चरणों में शरण पाओ तुम। सुख समृद्धि को तुम पाओ तुम॥
चौपाई 14
दुर्गा काली एक ही माता। जगत की रक्षक और विधाता। रूप अनेक पर एक ही देवी। सबकी माँ है श्यामल सेवी॥
चौपाई 15
काली माँ जग जननी भवानी। सर्व विद्या सर्व कला दानी। विद्या बुद्धि ज्ञान की दात्री। संकट में सहाय रहत माता॥
चौपाई 16
वरदायिनी माँ काली देवी। भक्तन की मनोकामना पूरी। शरण में आए जो मन भावे। तन मन धन सब कुछ पावे॥
चौपाई 17
अष्ट भुजा हैं काली माता। खड्ग पाश और शक्ति विधाता। चक्र गदा और तीर धनुष। काली माँ हैं शक्ति विभूष॥
चौपाई 18
भ्रकुटी भयंकर मुख विकराल। जीभ बाहर रक्त से लाल। शव पर खड़ी हैं महाशक्ति। भक्त जनों में जगावे भक्ति॥
चौपाई 19
काली माँ का रूप निराला। कंठ में पहने मुण्ड माला। महाकाल के साथ विराजे। तीनों लोकों में डंका बाजे॥
चौपाई 20
कलियुग में काली की महिमा। ऊंची है उनकी मान गरिमा। इस युग में काली की पूजा। और न कोई इसके दूजा॥
चौपाई 21
बंगाल में काली पूजा होती। दीपावली की रात है सोती। काली माँ का पर्व मनावे। नवरात्री में जन जन गावे॥
चौपाई 22
श्मशान में काली विराजे। चिता भस्म से शरीर साजे। योगिनी अप्सरा घेरे रहती। काली माँ की जय जय कहती॥
चौपाई 23
काली माँ की करो आराधना। पूरी होगी हर एक साधना। ध्यान में उनका रूप निहारो। मन के द्वारे उन्हें पुकारो॥
चौपाई 24
रात को काली पूजन करके। मन से सब संकट दूर करके। सुबह उनकी आरती करो। काली माँ में मन को धरो॥
चौपाई 25
तंत्र मंत्र में काली शक्ति। साधक को देती है भक्ति। तंत्र साधना सिद्ध करायें। काली माँ की कृपा दिलायें॥
चौपाई 26
नीला और काला है रंग। काली माँ का अद्भुत ढंग। नीलकण्ठ की प्रिया भवानी। जगत माता जगदम्बा रानी॥
चौपाई 27
अभय और वर देने वाली। भक्तों की रक्षक महाकाली। एक हाथ में खड्ग उठाई। दूजे हाथ में कपाल दिखाई॥
चौपाई 28
काली माँ की शरण में आओ। सुख शांति जीवन में पाओ। पाप ताप दूर हो जावे। काली माँ की कृपा आवे॥
चौपाई 29
काली माँ के नाम का जाप। दूर होता है सभी संताप। एक बार जो नाम जपे। काली माँ कृपा से भर दे॥
चौपाई 30
माँ काली की महिमा अपार। भक्तों पर करो उपकार। दर्शन देकर कृपा दिखाओ। भक्त जनों के मन को भाओ॥
चौपाई 31
काली माँ नमो नमो नमामि। तव चरण कमल में शीश नामी। जीवन के हर संकट में माँ। रखना सदा रक्षा करके माँ॥
चौपाई 32
रोग दोष और शत्रु भगाओ। जीवन में खुशियाँ भर जाओ। सम्पत्ति यश और सिद्धि दो। काली माँ आशीष दो॥
चौपाई 33
सर्व सिद्धि सर्व प्रदायिनी। भक्त मनोरथ पूरी करायिनी। जो मन से तुम्हें पुकारे। काली माँ तुरंत उद्धारे॥
चौपाई 34
काली माँ तुम्हारी जय हो। भक्तों के मन में जय हो। स्वर्ग मृत्यु पाताल में छाई। काली माँ सब जगह समाई॥
चौपाई 35
काली माँ को नमन करते। तन मन धन सब अर्पण करते। जीवन की नैया पार करो। काली माँ भव सागर तारो॥
चौपाई 36
जन्म जन्म की बाधा हरो। काली माँ जीवन पार करो। मोक्ष की राह दिखलाओ माँ। चरणों में स्थान दिलाओ माँ॥
चौपाई 37
काली माँ ही परम सहारा। काली माँ ही एक किनारा। काली माँ बिन कौन हमारा। काली माँ तुम ही उद्धारा॥
चौपाई 38
श्रद्धा भक्ति से जो गावे। काली माँ की कृपा पावे। चालीसा यह नित पढ़े जो। सुख समृद्धि सदा मिले जो॥
चौपाई 39
पाप नाश और पुण्य की वृद्धि। पढ़ने से होती है सिद्धि। सात बार पाठ जो करे। काली माँ से मनचाहा वरे॥
चौपाई 40
काली चालीसा यह पावन। भक्त जनों का मन मन भावन। नित प्रति पाठ करे जो कोई। काली माँ का दास वह होई॥

Frequently Asked Questions about Kali Chalisa

Who is Goddess Kali?

Goddess Kali (काली) is one of the most powerful forms of the Divine Mother in Hinduism. She is a fierce avatar of Durga, born from the brow of the goddess during the battle against the demon Raktabija. Her name means "she who is beyond time." She is dark-complexioned, with a fiery gaze, unbound hair, and wears a garland of severed heads. Despite her terrifying appearance, she is considered the most compassionate mother who destroys the ego and all negative forces.

When should the Kali Chalisa be recited during Navratri?

During Navratri (both Chaitra Navratri in spring and Shardiya Navratri in autumn), the Kali Chalisa is most powerfully recited on the seventh (Saptami), eighth (Ashtami), and ninth (Navami) nights, which are associated with the fierce forms of the Divine Mother — Kalaratri, Mahagauri, and Siddhidatri. The Chalisa can be recited at night after an evening puja.

What is the difference between Kali and Durga?

Durga is the primary form of the Divine Mother — serene, ten-armed, riding a lion, representing divine strength and protection. Kali is the most intense and fierce form that emerged from Durga's third eye in the heat of battle. While Durga is peaceful after victory, Kali represents the uncontrollable, primal energy that goes beyond all limits. They are ultimately the same goddess in different manifestations.

What is Kali Puja and why is it celebrated on Diwali night in Bengal?

Kali Puja is a major festival in West Bengal, Odisha, and Assam, celebrated on the new moon night of Kartika month — the same night as the pan-Indian festival of Diwali. According to tradition, Goddess Kali manifested on this dark night to destroy the demon Raktabija and all evil forces. Bengal's Kali Puja involves elaborate night-long worship, offerings, lamps, and community celebrations.

What are the benefits of reciting the Kali Chalisa?

Regular recitation of the Kali Chalisa is said to: remove fear and anxiety, protect the devotee from evil spirits and negative energies, destroy enemies and obstacles, grant courage and inner strength, bestow prosperity and spiritual accomplishment (siddhi), and ultimately lead the devotee towards liberation (moksha). The Phalashruti within the Chalisa states that reciting it seven times fulfils any sincere wish.

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